
एक छोटी सी दुकान के पास, गुलाबी फूलों की धुंधली आवाज़ में, एक युवा पुरूष उनकी चमकदार हाथों से एक छोटा सा पत्थर को उठाता है। वह एक पर्वत की ओर देखता है, जहाँ ऊँचे पहाड़ सूरज की धूप में झिल्ली जाते हैं। वह अपने हाथों को ऊपर उठाकर एक बार फिर देखता है, और फिर एक छोटी सी मुस्कान आ जाती है उसके चेहरे पर। इस सब कुछ एक सुंदर और आकर्षक प्रकाश में ढलता है।