
एक किवाड़ी भारतीय महिला सूर्य के पश्चिम होने के समय के अंदाज़ में एक विशाल भूखंड में उतरी हुई है, जहाँ उसका छान हुआ लंबा सर्फल का ड्रेस उसके शरीर पर धार कर रहा है। उसकी गर्म-गर्म सुनहरी धातु की बिजली के आकर्षण वाली चमकदार बिजली से घिसी हुई छाप है। उसकी ऊँची झुंझलाहुँआ सुनहरी चेहरे को ढालने वाली है। उसके चेहरे पर एक प्रकाशनीय कपड़े की छाया है। उसकी गर्म-गर्म सुनहरी चेहरे को ढालने वाली है। उसके चेहरे पर एक प्रकाशनीय कपड़े की छाया है।