
एक छोटी सी बच्ची लगती है कि वह मूल रूप से उस अंतराल से बाहर है, जो कि आधुनिक जीवन का एक हिस्सा है। वह एक छोटी सी घर की ओर झुकी हुई है, जहाँ पुराने पत्थर के ढेर और गर्म खिलौने छिपे हैं। वहाँ एक छोटी सी फूलों की बच्ची एक छोटी सी झोपड़ी पर बैठी है, जो कि एक छोटे से पत्थर के बीच में है। उसके हाथ में एक छोटा सा फूल है, जिसके पत्ते उसकी आँखों के समान हैं। उसकी आँखें खुली हैं और वह अपने चेहरे के ऊपर आकाश की ओर देख रही है। उसके पीछे एक छोटा सा बाग़ है, जहाँ पर्यावरण की आवाज़ें अंतराल में छिपी हुई हैं। आसमान पर सूरज की किरणें उसके चेहरे पर प्रकाशित होती हैं, और उसके चेहरे पर एक हल्की मुस्कान है। उसकी चेहरी में एक छोटी सी छाप है, जो कि उसके घर के बाहर है। उसकी चेहरी का एक छोटा सा फूल है, जो कि उसके घर के बाहर है। उसकी चेहरी का एक छोटा सा फूल है, जो कि उसके घर के बाहर है। उसकी चेहरी का एक छोटा सा फूल है, जो कि उसके घर के बाहर है।