
तीनों कमरे के ऊपर, सूर्यास्त की छायाओं में, एक चमकदार गुड़ह की बाँस के घड़ी के साथ एक खिलौना वाले कुटली की छवि। कुटली के भीतर एक छोटी सी शहद चिपकी हुई बाँस की घड़ी है, जो धीमी गति से घूम रही है। उसके चारों ओर, छोटे-छोटे बादल और सूरज की किरणें प्रकाशित हो रही हैं, जो आंधी की छाया को अलग-अलग आकार देती हैं। पृष्ठभूमि में गहरे सूरजमुखी और आंधी दीवारें हैं, जो काले-सफेद रंग का उपयोग करके आदर्श और अंतर्राष्ट्रीय स्वरूप दिखाती हैं। चित्र की गहराई और आंदोलन इस देश के प्रति भावनात्मक संबंध को दर्शाते हैं, जो आधुनिक भारत की ऐतिहासिक गहराई और स्वाभिमान को दर्शाते हैं।