
एक छोटी सी भूमि की दुनिया, जहाँ पहलवान अपने पैरों पर चलते हुए आसमान की ऊँचाइयों का आनंद लेते हैं। उनके पैर तेजी से बढ़ते हुए, उन्हें एक ऊँचे क्रैंक के ऊपर फेर देते हैं। ऊपर की ओर देखा जाता है, एक बेजान आसमान जिसमें धूल उड़ती है, और एक बड़ा सूरज उजाले के बीच उभर रहा है। यहाँ तक कि धूल के कणों का भी एक खास दृश्य बन रहा है, जैसे कि पहलवान उन्हें देख रहे हैं। उनकी प्याज़ी आँखों में आगे बढ़ जाती हैं, और उनकी आँखों की गहराई उनके दिल की गहराई से मेल खाती है। उनके दिल में एक गहरी शांति है, जो उनकी साँसों के बीच फैल जाती है। उनकी आँखों में एक ऐसी आशा है, जिससे यह सोचने का एक ऐसा अजीब अहसास होता है कि पहलवान अगले सूरज को देख सकते हैं।