
एक प्रथम वृद्ध ईस्ट एशियाई महिला एक चांदी की रात के बगीचे में खड़ी है, जहाँ छिलके उसके आसपास हवा में फूट रही हैं, जैसे हल्के हिमबारी। वह गहरी नीली रंग की एक असममित पोशाक पहनती है, जिसके छोटे-छोटे चांदी के तारों के एम्ब्रोइडरी चांदी की रात में चमकते हैं। चिपचिपी छिटो और रेशमी पर बनी हल्की झागे के ढाल उसके कंधों से बाहर झूल रही हैं, जैसे फूलों के छिलके चले जाते हैं। उसका मेकअप हल्का है— चमकदार पीलवानी त्वचा, हल्के सुनहरे चेहरे के गालों पर गुँजते हुए हैं, और उसकी आँखें चांदी की रात की गाढ़ी चमक को जगह देती हैं। उसका बाल आंतकों पर थोड़ा सा जमा है, और उनकी ऊपर झूलती हुई छाले उसके चेहरे की आभासी तस्वीर को और भी आकर्षक बना रही हैं। वातावरण शांत, रोमांसपूर्ण और ज्ञान भरा है, जो सौंदर्य को एक जीवंत हाइकु के रूप में दर्शाता है— शांति, रोमांस और गहरी अर्थात् धीमी गति में बनाए गए और सौंदर्य के प्रति गहरी जागरूकता वाली ऐसी एक दृश्य है।