
एक सप्रेशन की तरह ध्यान में बसा कला, जिसका अंग छोटे हैं और उसका पूरा शरीर एक चुपचाप देवभक्ति में रहता है। इसकी पूरी आवाज़ धीरे और शांत है, जैसे वह किसी गहरी सोच में डूबा हुआ है। इसके चेहरे पर खुशखबरी का झंकार लगा हुआ है, जैसे वह अब अपनी दुआ के लिए इच्छा व्यक्त कर रहा है। इसके बाल धीरे धीरे उठ रहे हैं, जैसे वह खुशी से अपनी दुआ सुन रहा है। इसके चौखट दिल की तरह देखे जाते हैं, जैसे वह खुद को इस सुखी आहट में शामिल कर रहा है। इसकी पूरी आवाज़ इस दुआ में डूब जाती है, जैसे वह अपने दिल से बोल रहा है।