
एक कैमरा का, अत्यधिक वास्तविक तस्वीर दिखाती है जिसमें एक स्त्री दिशाभ्रम में एकल एक गुलाबी दीवार पर खड़ी है। पिघल चुकी आसमान से धुंआ की छाया उसके पैरों पर छाया डालती है, और उसकी आंखों में एक ऐसा अनदेखा आश्चर्य है जो इस दुनिया के बाहर है। उसके पीछे एक छोटी सी दीवारी झरना पड़ा हुआ है, जो पानी के बहते हुए धीरे से गिरता है। उसकी आँखों में एक ऐसा गहराई है जो बोलने की आवाज़ चाहिए लेकिन बोल नहीं पा रही है। उसके पास एक छोटी सी झोली है जिसमें एक छोटी सी दुकान है, जहां एक पुराना फोन खरीदा गया था, जिसके सामने एक पुराना टूटा हुआ टेबल खड़ा है। उसकी आँखों में एक ऐसा अंतर्दृष्टि है जो उसके पास एक ऐसी दूरी है जो उसे अपनी दुनिया से अलग कर देती है।